
गुरुवार, 16 जून, 2005 को प्रकाशित
नागरिकता क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव संसद में मानसून सत्र में पेश किया जाएगा, यहां तक तो ठीक है. चर्चा हो तो संभवत: प्रस्ताव पास भी हो जाए. समस्या तो यह है कि सत्र के दौरान किसी दागी मंत्री का भूत जाग जाएगा या मुमकिन है किसी नेता का अपमान संसद के अपमान से बड़ा हो जाए. जब इतने अहम मुद्दे हमारे माननीय सांसदों के सामने हों तो भला नागरिकता क़ानून में संशोधन जैसे छोटे-मोटे कामों के लिए वक्त कहां बचेगा? शशि सिंह, मुम्बई
Thursday, June 16, 2005
दोहरी नागरिकता में इतनी देर क्यों?
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