
मंगलवार, 26 अप्रैल, 2005 को प्रकाशित
किसी भी संस्था या विभाग का प्रमुख होने के नाते हर अच्छी-बुरी बात की नैतिक ज़िम्मेदारी सीधे मंत्री की बनती है. जिस तरह किसी भी छोटे-बड़े काम का श्रेय लेने के लिए मंत्री महोदय उतावले रहते हैं ठीक उसी तरह दुर्घटनाओं या विभागों में भ्रष्टाचार की ज़िम्मेदारी भी उन्हीं की बनती हैं. लिहाजा मेरा मत इस्तीफे के हक़ में है. शशि सिंह, मुम्बई
Tuesday, April 26, 2005
क्या नेताओं को इस्तीफ़ा देना चाहिए?
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