
बुधवार, 06 अप्रैल, 2005 को प्रकाशित
श्रीनगर और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच बस सेवा को लंबे समय तक जारी रखना आसान तो नहीं होगा मगर नामुमकिन भी नहीं है. दरअसल दोनों देशों की आवाम भले ही रिश्तों में बेहतरी चाहती है मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए इन पड़ोसियों के बीच अमन वजूद पर संकट बन सकता है. मेरी यही दुआ है कि यह बस सिर्फ सड़क की दूरी ही नहीं दिलों की दूरी मिटाने में भी कामयाब हो. शशि सिंह, मुम्बई
Wednesday, April 06, 2005
क्या बस सेवा से तनाव घटेगा?
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