
शुक्रवार, 15 अप्रैल, 2005 को प्रकाशित
वो कहते हैं न कि 'क्वालिटी इज़ बेटर दैन क्वांटिटी'. हॉलीवुड और बॉलीवुड के साथ भी यही बात है. सिर्फ थोक के भाव में फिल्में बनाना ही बहादुरी नहीं होती, ज़रूरी यह है कि बॉलीवुड जो भी बनाए सोच-समझकर एक रणनीति के तहत बनाये. इसके लिए फिल्म निर्माण के हर मोर्चे पर तैयारी पुख़्ता करके ही निर्माताओं को मैदान में उतरना चाहिए. शशि सिंह, मुम्बई
Friday, April 15, 2005
क्या हो बदलाव बॉलीवुड में?
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