tag:blogger.com,1999:blog-176451472007-12-09T11:32:05.134-08:00बीबीसी से मेरी बातSHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comBlogger33125tag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1134723746016081932005-12-16T00:57:00.000-08:002005-12-16T01:02:26.026-08:00क्या गांगुली के साथ अन्याय हुआ?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/1.4.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/1.4.jpg" border="0" alt="सौरभ गांगुली " /></a><br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/12/051215_ganguly_controversy.shtml" target=_blank>गुरुवार, 15 दिसंबर, 2005 को प्रकाशित</a><br />यूँ तो और भी ग़म हैं जमाने में गांगुली के सिवा... पर क्या करें महाराजा का जो ग़म है चर्चे तो होंगे ही. डालमिया राज में गांगुली का बुरे प्रदर्शन के बाद भी बने रहना राजनीति थी और आज पवार के राज में संतोषजनक प्रदर्शन के बाद भी बेआबरू कर टीम से निकाले जाना भी राजनीति ही है. लिहाजा इसमें किसी भी तरह का कोई तर्क ढूंढ़ना बेकार है. तरस आता है गांगुली जैसे उन बेहतरीन खिलाड़ियों पर जो क्रिकेट की राजनीति का शिकार होते हैं. <strong>शशि सिंह, मुंबई</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1133365906484012062005-11-30T07:39:00.000-08:002005-11-30T07:53:43.383-08:00भाजपाः एक प्याले में खुशी एक में ग़म<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/1.3.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/1.3.jpg" border="0" alt="एनडीए नेता " /></a><br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/11/051129_bjp_crisis.shtml" target="_blank" >मंगलवार, 29 नवंबर, 2005 को प्रकाशित</a><br />यह कहना ग़लत होगा कि भाजपा को बिहार में हुए चुनाव के नतीजों से संजीवनी मिली है. वहाँ जनादेश लालू के खिलाफ और कुछ हद तक नीतीश कुमार की पार्टी को मिला है. लिहाज़ा केद्र की सत्ता हाथ से निकलने के बाद भ्रमित भाजपा की सेहत पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने वाला. भाजपा की सच्चाई बिहार की जीत नहीं, मध्य प्रदेश का कलह है. कांग्रेस पर गांधी परिवार से आगे नहीं सोच पाने का आरोप लगाने वाली भाजपा ने भी अटल-आडवाणी से आगे नहीं सोच पाने की आदत डाल ली है, जो आज भाजपा के भविष्य पर भारी पड़ रहा है. <strong>शशि सिंह, मुंबई</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1132981599428904302005-11-25T20:51:00.000-08:002005-11-25T21:14:51.986-08:00बीबीसी हिंदी डॉटकॉम आपकी नज़र में<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/1.2.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/1.2.jpg" border="0" alt="बीबीसी हिंदी " /></a><br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/11/051124_bbchinidcom.shtml" target=_blank>शनिवार, 26 नवंबर, 2005 को प्रकाशित</a><br />बीबीसी हिंदी की तारीफ़ करने बैठूँ तो पूरा पन्ना कम पड़े इसलिए सीधे अपेक्षाओं पर आ जाता हूँ. यहाँ अपेक्षाएँ पूरी होती हैं इसलिए बेझिझक अपनी मांगें रख रहा हूँ. 1- इंटरनेट पर रेडियो कार्यक्रमों की ऑडियो फ़ाइल को रैम के अलावा वेव और एमपी3 फ़ॉरमैट में भी उपलब्ध करवाएँ. 2- हिंदी के नाम पर जहाँ हर तरफ़ हिंग्लिश की अंधी गलियाँ हैं ऐसे में इस साइट पर संदर्भ स्रोत की भी ज़िम्मेदारी है लिहाज़ा जिस तरह आपने Learning English का पन्ना रखा है वैसा ही कुछ 'अच्छी हिंदी' के प्रसार के लिए भी करें. 3- एक वक़्त था जब इंटरनेट पर हिंदी बमुश्किल ही देखने को मिलती थी पर आज इसका काफी विकास हो चुका है. इस विकास से जुड़ी सूचनाओं के भूखों की निगाहें भी आपकी ओर हैं. 4- ट्रांजिस्टर के दौर से मीलों आगे आ चुके बीबीसी हिंदी से ब्लॉगिंग और पॉडकास्टिंग की दुनिया की ख़बरें भी अपेक्षित हैं. <strong>शशि सिंह, मुंबई. </strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1132980555166536242005-10-28T20:45:00.000-07:002005-11-25T21:10:30.403-08:00सीबीआई जाँच से कितनी उम्मीद?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/1.0.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/1.0.jpg" border="0" alt="" /></a><br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/10/051028_sikh_cbi.shtml" target=_blank>शुक्रवार, 28 अक्तूबर, 2005 को प्रकाशित</a><br />साँप के गुज़र जाने के बाद लकीर पीटने की कहावत सुनी थी. लकीर मिटने के बाद साँप को ढूँढने जैसी कहावत अगर कभी गढ़ी गई तो उसकी मिसाल के तौर पर सिख विरोधी दंगों का ज़िक्र ज़रूर होगा. <strong>शशि सिंह, मुंबई</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130011741871097202005-10-21T12:59:00.000-07:002005-10-22T13:22:33.146-07:00क्या ये विपत्ति अवसर लेकर आई है?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/119.jpg"><img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/119.jpg" border="0" alt="भूकंप पीड़ित" /></a><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/10/051021_quake_loc.shtml" target=_blank>शुक्रवार, 21 अक्तूबर, 2005 को प्रकाशित </a><br />विपत्तियों आती ही हैं रिश्तों को फिर से परिभाषित करने के लिए. अगर 1947 के बँटवारे के रूप में आई विपत्ति ने हमारे रिश्तों को दुश्मनी का नाम दिया तो शायद 2005 का भूकंप हमारे रिश्तों को दोस्ती का जामा पहनाना चाहता है. दोनों तरफ के हुक़्मरान कुदरत के दिये इस मौके को पहचानें और रिश्तों में एक ऐसा जलाजला पैदा करें जो दुश्मनी की बुनियाद को नेस्तनाबूत कर दे. <strong>शशि सिंह, मुम्बई</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129703535948520752005-10-19T12:05:00.000-07:002005-10-18T23:33:15.880-07:00क्या बिहार में कुछ बदलेगा?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/117.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/117.jpg" border="0" alt="बिहार विधानसभा" /></a><br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/10/051018_bihar_forum.shtml" target=_blank>बुधवार, 19 अक्तूबर, 2005 को प्रकाशित </a><br />बिहार में मौजूदा राजनीतिक विकल्पों से किसी चमत्कार की उम्मीद करना भोलापन होगा. वैसे भी बिहारी जनता अब भोली नहीं रह गई है. अब वे अपनी समस्याओं का समाधान राजनीति से इतर तलाशने में लग गई है. यही बात पूरे राजनीतिक परिवेश के लिए पहेली बनी हुई है. दुनिया को गणतंत्र का उपहार देने वाला बिहारी समाज संभवत: किसी नई व्यवस्था की बुनावट में लगा है. इसीलिए हमें दिल थामकर बिहार और बिहारियों पर नज़र रखनी होगी. <strong>शशि सिंह, मुंबई</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129574696448208172005-10-16T23:39:00.000-07:002005-10-18T02:03:59.806-07:00क्या गांगुली को दोबारा मौका मिलना चाहिए?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/116.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/116.jpg" border="0" alt="चैपल और गांगुली " /></a> <br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/10/051016_ganguly_team.shtml" target=_blank>रविवार, 16 अक्तूबर, 2005 को प्रकाशित</a> <br />इसमें कोई शक नहीं कि गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को अपने अंदाज में नई ऊँचाई तक पहुँचाया है. लेकिन एक महान खिलाड़ी होने का ये क़तई मतलब नहीं कि बुरे प्रदर्शन के बाद भी वह टीम में बना रहे. अगर गांगुली का खेल दोबारा से अपने सुनहरे दिनों की तरफ लौटता है तो उन्हें फिर से कप्तान के रूप में देखना हर भारतीय की चाहत होगी... लेकिन तब तक चयनकर्ताओं को उन्हें कप्तान तो क्या टीम में भी रखने से पहले चार बार सोचना चाहिए. <b>शशि सिंह, मुम्बई</b>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129351984232455222005-10-14T21:48:00.000-07:002005-10-17T09:32:56.366-07:00क्या सीमाओं पर लचीला रुख़ अपनाया जाए?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/19.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/19.jpg" border="0" alt="भूकंप पीड़ित" /></a><br /><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/10/051012_quake_borders_forum.shtml" target="_blank">शुक्रवार, 14 अक्तूबर, 2005 को प्रकाशित</a><br />बेशक भूकंप के ज़रिये भगवान ने दोनों मुल्कों में बसे अपने चहेतों को हमसे दूर अपने दरबार में बुला लिया है. मगर अवाम को उनका एक साफ़ संदेश है; अपने आँसुओं के ज़रिये रिश्तों पर जमीं गर्द को धो डालो. <strong>शशि सिंह, मुम्बई</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129008476541257602005-10-10T22:10:00.000-07:002005-10-22T23:53:03.430-07:00भारत और पाकिस्तान में भूकंप की त्रासदी<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/12.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/12.jpg" border="0" alt="भूकंप पीड़ित" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/10/051010_quake_forum.shtml" target="_blank"> सोमवार, 10 अक्तूबर, 2005 को प्रकाशित</a><br />थोड़ी सी ताक़त मिलते ही हम दुनिया फ़तह करने के मंसूबे बाँधने लगते हैं. इसी अहम में कुदरत को कमज़ोर और बेबस समझ उसे रौंदने की हिमाकत करने से भी नहीं चूकते... पर भूल जाते हैं कि हर किसी के सब्र की इंतहा होती है. पिछले एक साल में पूरी दुनिया में कुदरत के क़हर से हुई तबाही के आंकड़ों ने हमें हमारी औकात बता दी है. ताज़ा भूकंप भी कुदरत को हमसे मिले दर्द की प्रतिक्रिया भर है. <strong>शशि सिंह, मुम्बई.</strong>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130054661372063752005-07-07T01:01:00.000-07:002005-10-23T01:33:19.656-07:00लंदन के विस्फोटों पर प्रतिक्रिया<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/129.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/129.jpg" border="0" alt="लंदन में विस्फोट " /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/07/050707_london_blasts.shtml" target="_blank">गुरुवार, 07 जुलाई, 2005 को प्रकाशित</a><br />आतंकवादियों की कोई जाति, धर्म, आस्था या राष्ट्र नहीं होता. वे तो भटके हुए ऐसे लोग हैं जो मानवता के लिए भस्मासुर साबित हो रहे हैं. वैसे इन भस्मासुरों को विध्वंस की ये ताक़त कहीं न कहीं इन महादेवों के ही आशीर्वाद से मिला है जो इनकी हरकतों से बिफरे पड़े हैं. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130054404089120772005-07-02T00:53:00.000-07:002005-10-23T01:00:04.090-07:00लाइव 8 से क्या फ़ायदा होगा?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/127.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/127.jpg" border="0" alt="लाइव 8 " /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/07/050702_live8_africa.shtml" target="_blank">शनिवार, 02 जुलाई, 2005 को प्रकाशित</a><br />दुनिया भर में एक साथ संगीत समारोह आयोजित करके धनी देशों का ध्यान अफ्रीका की ग़रीबी की ओर खींचने की कोशिश! ग़म भूलाने को ग़ालिब ख़्याल अच्छा है, मगर नतीजा शायद ही कुछ निकले. वैसे एक बात तो है कि ऐसे समारोह भले ही अमीर देशों का ध्यान न खींच पाएं पर दुनिया भर के संगीतप्रेमियों की तवज्जो ज़रूर हासिल कर लेते हैं. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130053811546563022005-06-30T00:39:00.000-07:002005-10-23T00:50:11.556-07:00कॉल सेंटर की निगरानी कैसे हो?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/126.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/126.jpg" border="0" alt="कॉल सेंटर" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050630_callcentres_forum.shtml" target="_blank">गुरुवार, 30 जून, 2005 को प्रकाशित</a><br />भारत में एक उफान की तरह शुरू हुए कॉलसेंटर व्यवसाय में गुणवत्ता तो है मगर गोपनीयता बनाए रखने के लिए थोड़ी निगरानी की ज़रुरत है. साथ ही मौजुदा क़ानून के बारे में कर्मचारियों में बेहतर समझ विकसित करना भी ज़रुरी है. भारतीय कॉलसेंटर के कर्मचारियों में उत्साह तो बहुत देखा जाता है. इसी अनुपात में यदि उनमें ज़िम्मेदारियों का अहसास भी जोड़ने में कामयाबी मिल गई तो भविष्य में न सिर्फ ग्राहकों और कंपनियों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि भारतीय बीपीओ उद्योग नई ऊचाइयाँ तय करेगा. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130052633653888092005-06-27T00:27:00.000-07:002005-10-23T00:37:12.416-07:00मुख़्तार माई मामले पर राय<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/125.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/125.jpg" border="0" alt="मुख़्तार माई" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050627_mukhtar_forum.shtml" target="_blank">सोमवार, 27 जून, 2005 को प्रकाशित</a><br />ऐसे मामलों के सिर्फ़ मीडिया में आने से कुछ सकारात्मक नहीं होने वाला. ज़रूरत इस बात की है कि दोषियों को कड़ी सज़ा मिले. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130052399377945982005-06-20T00:23:00.000-07:002005-10-23T00:26:39.380-07:00पसंदीदा किताब कौन सी है?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/123.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/123.jpg" border="0" alt="किताब" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050620_book_forum.shtml" target="_blank"> सोमवार, 20 जून, 2005 को प्रकाशित</a><br />कई किताबों ने अलग-अलग ढंग से मुझ पर अपना प्रभाव छोड़ा है. फिर भी मैं कह सकता हूं कि प्रेमचंद की 'गोदान' मेरी पसंदीदा किताब है. प्रेमचंद का हर शब्द मुझे प्यारा है और उनके आदर्शवाद के तो क्या कहने. लेखन में उनकी कोई सीमाएं नहीं थीं लेकिन समाज में एक लेखक की सीमाओं से क्षुब्ध प्रेमचंद ने अपने इस उपन्यास में बिना आदर्शवादी विकल्प के सीधे-सीधे यथार्थ पेशकर मुझे चौंका दिया. यह मेरे प्रिय लेखक की अपने आप से बग़ावत थी जो गाहे-बगाहे मुझे आज भी झकझोरती रहती है. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130051736274758102005-06-16T00:10:00.000-07:002005-10-23T00:15:36.276-07:00दोहरी नागरिकता में इतनी देर क्यों?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/122.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/122.jpg" border="0" alt="" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050616_citizenship_issue.shtml" target="_blank">गुरुवार, 16 जून, 2005 को प्रकाशित</a><br />नागरिकता क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव संसद में मानसून सत्र में पेश किया जाएगा, यहां तक तो ठीक है. चर्चा हो तो संभवत: प्रस्ताव पास भी हो जाए. समस्या तो यह है कि सत्र के दौरान किसी दागी मंत्री का भूत जाग जाएगा या मुमकिन है किसी नेता का अपमान संसद के अपमान से बड़ा हो जाए. जब इतने अहम मुद्दे हमारे माननीय सांसदों के सामने हों तो भला नागरिकता क़ानून में संशोधन जैसे छोटे-मोटे कामों के लिए वक्त कहां बचेगा? <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130050811474914872005-06-13T23:56:00.000-07:002005-10-23T00:01:04.883-07:00क़ानून के सामने 'ख़ास लोग'<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/121.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/121.jpg" border="0" alt="पुलिस के साथ रसेल क्रो" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050613_bail_forum.shtml" target="_blank">सोमवार, 13 जून, 2005 को प्रकाशित</A><br />दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का दंभ भरने वाले भारत के लिए 'खास' और 'आम' कानून दुर्भाग्य की बात है. इस तरह का दोहरा व्यवहार ही वंचित वर्ग में असंतोष का बीज बोता है. यही बीज जब पेड़ बन जाते हैं तब उसे अलगाववादी, आतंकवादी, नक्सली और न जाने क्या-क्या नाम दे दिये जाते हैं. भई बात सीधी है, झोपड़े का हक़ मार कर बंगलों की चारदीवारी ऊंची करनेवाले राजकीय कानून को भले तोड़-मरोड़ लें, मगर प्रकृति के न्याय से बच नहीं पाएंगे. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1130050161619641952005-06-06T23:45:00.000-07:002005-10-22T23:50:23.956-07:00आडवाणी के बयान पर राय<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/120.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/120.jpg" border="0" alt="आडवाणी" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050606_advani_jinnah.shtml" target="_blank">सोमवार, 06 जून, 2005 को प्रकाशित</A><br />पता नहीं क्यों भाजपा और संघ परिवार के मुद्दे अक्सर भावनात्मक ही क्यों होते हैं. क्या फर्क पड़ता है यदि आडवाणी ने जिन्ना को 'धर्मनिरपेक्ष नेता' कह दिया. इसे तो मैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का इतिहास के प्रति दुराग्रहों के खुलते गांठ के रूप में देखता हूं. दो देशों के रिश्तों में सुधार के लिए यदि तथाकथित विचारधारा (अहं) से थोड़ा उन्नीस-बीस होना भी पड़े तो भी यह घाटे का सौदा नहीं होगा. पर हां, ऐसी ही उम्मीद हमें पाकिस्तान के दक्षिणपंथियों से भी होगी. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129462722048411992005-06-03T04:29:00.000-07:002005-10-16T05:08:29.393-07:00किस फ़िल्म ने छोड़ी गहरी छाप<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/115.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/115.jpg" border="0" alt="गुरुदत्त की प्यासा" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050603_best_movie.shtml" target="_blank">शुक्रवार, 03 जून, 2005 को प्रकाशित</A><br />'मदर इंडिया' से मैं सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा हूँ. फ़िल्म का कथानक, संवाद, अदाकारी, संगीत या फिर निर्देशन... हर मोर्चे पर यह फ़िल्म बेहतरीन सिनेमा का नमूना तो पेश करती है, मगर यह फ़िल्म मेरे लिए सिर्फ़ सिनेमा न होकर सामाजिक सरोकारों का दस्तावेज़ है. यह फ़िल्म उस दौर में आई जब आज़ाद भारत अपने को एक राष्ट्र रूप में स्थापित करने की जद्दोजहद में लगा था. मेरी नज़र में यह फ़िल्म किशोर राष्ट्र को उम्दा संस्कारों की सीख देने वाली नायाब कलाकृति है. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129460132470129822005-06-01T03:50:00.000-07:002005-10-16T03:55:32.483-07:00फ़िल्मों में धूम्रपान पर राय<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/114.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/114.jpg" border="0" alt="शाहरुख़ ख़ान " /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/06/050601_aamne_saamne_aap.shtml" target="_blank">बुधवार, 01 जून, 2005 को प्रकाशित</A><br />सिनेमा और टीवी के पर्दे पर सिगरेट के इस्तेमाल पर लगी रोक बेशक एक सराहनीय कदम है लेकिन धूम्रपान से होने वाले नुक़सानों के ख़िलाफ़ ऐसे क़दम तब तक नाकाफ़ी ही साबित होंगे जब तक कि इसकी जड़ यानी कि इसके निर्माण पर रोक न लगाई जाए. भला नैतिकता का यह कैसा पाठ कि एक तरफ तो हमारी सरकार ऐसी पाबंदियों कि बात करती है वहीं दुसरी तरफ तम्बाकू उद्योग से प्राप्त होने वाले भारी राजस्व को भी छोड़ना नहीं चाहती. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129458583707005492005-05-30T03:26:00.000-07:002005-10-16T03:29:43.706-07:00क्या आप भारतीय प्रधानमंत्री से सहमत हैं?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/113.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/113.jpg" border="0" alt="" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/05/050530_borderless_kashmir.shtml" target="_blank">सोमवार, 30 मई, 2005 को प्रकाशित</A><br />प्रधानमंत्री का यह बयान सौ फ़ीसदी सही है. कश्मीर के बीच की सीमा को अर्थहीन बनाना ही कश्मीर समस्या का सबसे बेहतर समाधान होगा, क्योंकि तब न रहेगा बांस न बजेगी बांसूरी. मेरी दुआ है कि अगर हम इसी तरह सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हम 1947 की कड़वी यादों को भूलाकर जर्मनी के इतिहास को दोहराएँगे. <B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129458204816638442005-05-25T03:18:00.000-07:002005-10-16T03:23:24.816-07:00सुनील दत्त से जुड़ी यादें<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/112.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/112.jpg" border="0" alt="सुनील दत्त" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/05/050525_sunildutt_forum.shtml" target="_blank">बुधवार, 25 मई, 2005 को प्रकाशित</A><br />जितना सार्थक जीवन दत्त साहब ने जिया उतना कम ही लोगों को नसीब होता है. वे एक उम्दा कलाकार और ईमानदार राजनेता ही नहीं बल्कि इस सबसे बढ़कर एक बेहतरीन इनसान थे. मुझे यह कहते हुए तनिक भी झिझक नहीं कि 75 साल का यह बुजूर्ग हम युवाओं से कहीं ज्यादा युवा था. दत्त साहब हमें आपकी कमी हमेशा खलेगी.<B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129457573026991362005-05-16T03:09:00.000-07:002005-10-16T03:15:33.516-07:00क्या मीडिया सही भूमिका निभा रहा है?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/111.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/111.jpg" border="0" alt="विरोध प्रदर्शन" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/05/050516_koran_media.shtml" target="_blank">सोमवार, 16 मई, 2005 को प्रकाशित</a><br />'सबसे तेज़' बनने के चक्कर में अक्सर मीडिया की भद्द पिटती रही है. 'सबसे तेज़' का शार्टकट सनसनी है और यह सनसनी जंक फ़ूड की तरह है जिसे खाकर चटख़ारे तो लिये जा सकते हैं मगर उसकी क़ीमत समाज के बिगड़ते स्वास्थ्य के रूप में चुकानी पड़ती है. 'न्यूज़वीक' की अपुष्ट ख़बर की वजह से 15 लोगों की मौत यही ज़ाहिर करता है कि 'न्यूज़वीक' जैसे मीडिया संगठनों को या तो अपनी ताक़त का अंदाज़ा नहीं है या फिर वे इसके बेजा इस्तेमाल का ही मन बना चुके हैं.<B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129455146260252982005-05-16T02:29:00.000-07:002005-10-16T02:52:38.766-07:00हड़ताल का सहारा कितना उचित है?<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/110.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/110.jpg" border="0" alt="बीबीसी स्टूडियो" /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/05/050516_srike_forum.shtml" target="_blank">सोमवार, 16 मई, 2005 को प्रकाशित</A> हड़ताल बेशक एक अनुत्पादक और नकारात्मक प्रतिक्रिया है. यह संस्थान और कर्मचारियों के आपसी हितों के टकराव का सतह पर आ जाने सूचक भी है. इसे अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र का द्वंद्व भी माना जा सकता है. मेरा मानना है कि इस नाजुक मुद्दे पर दोनों पक्षों को लाभ-हानि और अहं के संकुचित दायरे से ऊपर उठकर सोचने की जरुरत है. ऐसा करके ही इस दुनिया को प्रगतिशील और सौहार्दपूर्ण जगह बनाई जा सकती है.<B> शशि सिंह, मुम्बई</B></TD>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129108661404084642005-05-09T14:14:00.000-07:002005-10-16T02:59:23.853-07:00बीबीसी हिंदी की पैंसठवीं सालगिरह<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/18.jpg"><img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/18.jpg" border="0" alt="बीबीसी कारवां " /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/05/050509_bbc_65yrs.shtml" target="_blank">सोमवार, 09 मई, 2005 को प्रकाशित</A> ख़बरों की दुनिया में बीबीसी का न तो कभी कोई सानी था न आज है. आज मैं ख़ुद एक पत्रकार हूँ लेकिन बीबीसी का श्रोता और पाठक बने रहने का सुख एक अलग ही अहसास है? हमारे दादाजी के समय शुरू हुआ बीबीसी हिंदी का सफ़र हमारे पोतो-परपोतों और उससे भी आगे की पीढ़ियों तक अनवरत जारी रहे यही मेरी दुआ है.<B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-17645147.post-1129107393436433412005-05-06T13:53:00.000-07:002005-10-12T01:57:46.923-07:00ब्रितानी चुनाव पर प्रतिक्रिया<a href="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/1600/17.jpg"><img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/4602/778/320/17.jpg" border="0" alt="टोनी ब्लेयर " /></a><br /><A href="http://www.bbc.co.uk/hindi/forum/story/2005/05/050506_uk_results.shtml" target="_blank">शुक्रवार, 06 मई, 2005 को प्रकाशित</A> <br />टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में लेबर पार्टी का एक बार फिर से सत्ता में आना नि:संदेह ब्रिटेन के इतिहास के लिए एक बड़ी घटना है. ब्लेयर को चुनकर अंग्रेजी जनता ने उनकी पीठ तो थपथपाई है, मगर जीत की बढ़त को कम करके इराक पर उनकी नीतियों के लिए हल्के से उनके कान भी मरोड़े हैं.<B> शशि सिंह, मुम्बई</B>SHASHI SINGHhttp://www.blogger.com/profile/15088598374110077013noreply@blogger.com